Monday, July 4, 2016

#2901-3000


2901 राज्य को नीतिशास्त्र के अनुसार चलना चाहिए।
2902 राज्य नीति का संबंध केवल अपने राज्य को सम्रद्धि प्रदान करने वाले मामलो से होता है।
2903 राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते है।
2904 राज्यतंत्र से संबंधित घरेलु और बाह्य, दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।
2905 रात में सोने से पहले हर किसी को हर किसी बात के लिए क्षमा कर देना ही एक लम्बे और सुखदायक जीवन का रहस्य है।
2906 रात होने पर अनेक जातियों के पक्षी कौवा, तोता कबूतर आदि एक ही वृक्ष पर आ बैठते हैं और रात्रि वही बिताते हैं और प्रभात होने पर दाना चुगने के लिए भिन्न-भिन्न दिशाओ में उड़ जाते हैं। यही स्थिति परिवार के सदस्यों की भी हैं, कुछ लोग एक परिवार रूपी वृक्ष पर आकर बैठते हैं और समय आने पर चल देते हैं इसमें दुखी होने की कोई बात नहीं आवागमन और संयोग-वियोग तो जीवो का नित्य धर्म हैं।
2907 रात्रि में नहीं घूमना चाहिए।
2908 राय,  ज्ञान और ज्ञान के बीच एक माध्यम है। 
2909 राष्ट्रभक्ति की भावना सामाजिक भेदों से पैदा होने वाली घृणा से अक्सर ज्यादा मजबूत होती है। अन्तर्राष्ट्रीयवाद तो इसके आगे हमेशा कमजोर होता है।
2910 राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।
2911 रिलायंस की सफलता का राज़ मेरी महत्वाकांक्षा और अन्य पुरुषों का मन जानना है.
2912 रिलायंस में विकास की कोई सीमा नहीं है। मैं हमेशा अपना vision दोहराता रहता हूँ। सपने देखकर ही आप उन्हें पूरा कर सकते हैं।
2913 रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो उन्हे तोङना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो अगर प्यास नही बुझा सकता पर आग तो बुझा सकता है।
2914 रिश्ते, आजकल रोटी की तरह हो गए जरा सी आंच तेज क्या हुई जल भुनकर खाक हो जाते।
2915 रूप और यौवन से संपन्न तथा उच्च कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी यदि विध्या से रहित है तो वह बिना सुगंध के फूल की भांति शोभा नहीं पाता।
2916 रूप की शोभा गुणों से होती हैं, कुल की शोभा शील अथार्थ अच्छे आचरण से होती हैं विधा की शोभा धन प्राप्ति से होती हैं इसी प्रकार धन की शोभा उसके भोगने से होती हैं।
2917 रूप के अनुसार ही गुण होते है।
2918 रूप-यौवन से सम्पन्न, बड़े कुल में पैदा होते हुए भी, विद्याहीन पुरुष, बिना गंध के फूल पलाश के समान शोभा अर्थात आदर को प्राप्त नहीं होता।
2919 रोकथाम के बिना उपचार अस्थायी है।
2920 रोज स्टेटस बदलने से जिंन्दगी नहीं बदलती जिंदगी को बदलने के लिये एक स्टेटस काफी है.
2921 रोज़ाना व्यायाम करने से शरीर चुस्त रहता है, साथ ही दिमाग को भी शान्ति मिलती है।
2922 लक्ष्मी अनित्य और अस्थिर है, प्राण भी अनित्य है। इस चलते-फिरते संसार में केवल धर्म ही स्थिर है।
2923 लक्ष्मी भगवान विष्णु से कहती है 'हे नाथ ! ब्राह्मण वंश के आगस्त्य ऋषि ने मेरे पिता (समुद्र)को क्रोध से पी लिया, विप्रवर भृगु ने मेरे परमप्रिय स्वामी (श्री विष्णु) की छाती में लात मारी, बड़े-बड़े ब्राह्मण विद्वानों ने बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक मेरी शत्रु सरस्वती को अपनी वाणी में धारण किया और ये (ब्राह्मण) उमापति (शंकर) की पूजा के लिए प्रतिदिन हमारा घर (श्रीफल पत्र आदि) तोड़ते है। हे नाथ ! इन्ही कारणों से सदैव दुःखी मैं आपके साथ रहते हुए भी ब्राह्मण के घर को छोड़ देती हूं।
2924 लक्ष्य  प्राप्त  करना  मायने  रखता  है. और  जो  बहादुरी  भरे  काम  और  साहसिक  सपने  आप  पूरे  करना  चाहते  हैं  उनके  बारे  में  लिखना  उन्हें  पूरा  करने  के  लिए  चिंगारी  का  काम  करेगा.
2925 लकड़ी, पत्थर और धातु-सोना, चांदी, तांबा, पीतल आदि की बनी देवमूर्ति में देव-भावना, अथार्थ देवता को साक्षात् रूप से विधमान समझ कर ही श्रदासहित उसकी अर्चना पूजा करनी चाहिए, जो मनुष्य जिस भाव से मूर्ति का पूजन करता हैं, श्री विष्णुनारायण की कृपा से उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती हैं।
2926 लगन हो पक्की तो मंजिल का पता मिलता है ! चाहत हो सच्ची तो पत्थर में खुदा मिलता है।।
2927 लगभग सभी व्यक्ति कठिनाई को झेल सकते है, पर अगर आपको उनका चरित्र जानना हो तो उन्हें शक्ति दे दीजिए। 
2928 लगभग हर व्यक्ति जो किसी आईडिया को विकसित करता है, उस पर तब तक काम करता है जब तक वो असंभव न लगने लगे, और उसके बाद वो निराश हो जाता है जबकि ये वो जगह नहीं जहाँ निराश हुआ जाए।
2929 लगातार पवित्र विचार करते रहे, बुरे संस्कारो को दबाने के लिए एकमात्र समाधान यही है।
2930 लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
2931 लम्बी बहसों से दूर रहे वाले लोग हमेशा खुश रहते हैं, क्योकि वे क्रोध को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते इसलिए आप दूसरों के नजरिये को समझिये और उनके करीब रहने का प्रयास कीजिये।
2932 लम्बे नाख़ून वाले हिंसक पशुओ, नदियों, बड़े बड़े सींग वाले पशुओ, शस्त्रधारियो, स्त्रियों और राज-परिवारों का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए
2933 लम्बे-लम्बे भाषणों से कही अधिक मूल्यवान है इंच भर कदम बढ़ाना।
2934 लाख आदि, तेल, नील, कपडे रेंज के रंग, शहद घी मदिरा और मांस आदि का व्यापार करने वाला ब्राह्मण शुद्र कहलाता हैं।
2935 लाड-प्यार से पुत्र और शिष्य में दोष उत्पन्न हो जाते हैं और ताड़ना से उनमे से गुणों का विकास होता हैं उनका कहना हैं की इसलिए पुत्र और शिष्य को लाड-प्यार करने की अपेक्षा ताड़ना करनी चाहिए।
2936 लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।
2937 लाल रंग के किंशुक पुष्प दिखने में तो बहुत सुन्दर लगते हैं, परन्तु उनमे सुंगध नहीं होती, अतः कोई भी उनकी और ध्यान नहीं देता जिस प्रकार गंधरहित होने से किंशुक के पुष्प उपेक्षित ही रहते हैं और देवो-सम्राटो के सर पर चढ़ने का गौरव नहीं प्राप्त कर पाते उसी प्रकार उच्चे कुल में उत्पन्न विधा से रहित रूपवान युवक भी समाज में आदर प्राप्त नहीं कर पाते।
2938 लालची व्यवहार से भयानक कुछ भी नहीं।
2939 लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ...पर बेजुबान जीव को मार के खाता है
2940 लीडर को अपनी क्षमता के अनुरूप नेतृत्व करने के बाद हट जाना चाहिए।  नहीं तो उनकी जलाई आग कहीं उनकी ही राख से बुझ न जाए। 
2941 लेखक को मानवजाति का इंजीनियर कहना गलत नही है।
2942 लोक चरित्र को समझना सर्वज्ञता कहलाती है।
2943 लोक व्यवहार शास्त्रों के अनुकूल होना चाहिए।
2944 लोकतंत्र  सरकार  का  सबसे  खराब  रूप  है  सिवाय  उन  सरकारों  के जिन्हें  इससे  पहले  आजमाया  जा  चुका  है।
2945 लोकतंत्र तब है जब किसी अमीर की जगह कोई गरीब देश का शासक हो।
2946 लोकतंत्र तानाशाही में गुजरता है। 
2947 लोग अवास्तविक, विसंगत और आत्मा केन्द्रित होते हैं फिर भी उन्हें प्यार दीजिये।
2948 लोग इसकी परवाह नहीं करते हैं कि आप कितना जानते हैं, वो ये जानना चाहते हैं कि आप कितना ख़याल रखते हैं।
2949 लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है, और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..
2950 लोग धूल की तरह होते हैं। या तो वो आपको पोषण दे एक व्यक्ति के रूप में विकसित होने में मदद कर सकते हैं, या वो आपका विकास रोककर और थका कर मृत कर सकते हैं।
2951 लोग बस वही देखते है, जो देखने के लिए वो तैयार होते है।
2952 लोग वही के वही बने रहते है, तब भी जबकि उनके मुखौटे निकल चुके होते है।
2953 लोग सबसे ज्यादा झूठ तीन बार कहते है- चुनाव से पहले, जंग के दौरान और शिकार करते वक़्त।
2954 लोग हमेशा ही परिवर्तन से डरते है, बिजली से भी डरे थे जब तक की उसका अविष्कार नही हुआ था।
2955 लोगो की हित कामना से मै यहां उस शास्त्र को कहूँगा, जिसके जान लेने से मनुष्य सब कुछ जान लेने वाला सा हो जाता है।
2956 लोगो को यह नहीं पता की उन्हें क्या नहीं पता 
2957 लोगों का बड़ा समूह छोटे झूठ की अपेक्षा बड़े झूठ का आसानी से शिकार बन जाता है। 
2958 लोगों के साथ विन्रम होना सीखे।  महत्त्वपूर्ण होना अच्छा है पर अच्छा होना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।
2959 लोगों को काम के लिए प्रोत्साहित करना और अहसास कराना की ये उन्हीं का सुझाव था, ये सबसे समझदारी की बात है।
2960 लोगों में सुधार लाए बिना, सुनहरे भविष्य की कामना करना बिल्कुल गलत है। ऐसा तभी मुमकिन होगा जब हर व्यक्ति खुद को बदलने की कोशिश करें। इसी के साथ वह अपनी जिम्मेदारियों को भी समझे।
2961 लोभ द्वारा शत्रु को भी भ्रष्ट किया जा सकता है।
2962 लोभ सबसे बड़ा अवगुण है, पर निंदा सबसे बड़ा पाप है, सत्य सबसे बड़ा तप है और मन की पवित्रता सभी तीर्थो में जाने से उत्तम है। सज्जनता सबसे बड़ा गुण है, यश सबसे उत्तम अलंकार(आभूषण) है, उत्तम विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है और अपयश मृत्यु के समान सर्वाधिक कष्टकारक है।
2963 लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है। परनिंदा से बड़ा पाप क्या है और जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है। जिसका ह्रदय शुद्ध है उसे तीर्थ यात्रा की क्या जरूरत है। यदि स्वभाव अच्छा है तो और किस गुण की जरूरत है। यदि कीर्ति है तो अलंकार की क्या जरुरत है। यदि व्यवहार ज्ञान है तो दौलत की क्या जरुरत है। और यदि अपयशी या अपमानित है तो मृत्यु कि क्या जरुरत हैं अथार्थ वह व्यक्ति जीते जी ही मरा हुआ हैं।
2964 लोभियों का शत्रु भिखारी है, मूर्खो का शत्रु ज्ञानी है, व्यभिचारिणी स्त्री का शत्रु उसका पति है और चोरो का शत्रु चंद्रमा है।
2965 लोभी और कंजूस स्वामी से कुछ पाना जुगनू से आग प्राप्त करने के समान है। 
2966 लोभी को धन से, घमंडी को हाथ जोड़कर, मूर्ख को उसके अनुसार व्यवहार से और पंडित को सच्चाई से वश में करना चाहिए।
2967 लोभी व्यक्तियों के लिए चंदा, दान मांगने वाले व्यक्ति शत्रुरूप होते हैं, मूर्खो को भी समझाने-बुझाने वाला व्यक्ति अपने शत्रु लगता हैं। दुराचारिणी स्त्रियों के लिए पति ही उनका शत्रु होता हैं, चोर चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं इसलिए मुर्ख को सीख और लोभी से कुछ मांगने की भूल नहीं करनी चाहिए।
2968 लड़ना गलत नहीं, लेकिन लड़ने की सोच रखना सबसे गलत है।
2969 लड़ाई-झगडे ख़त्म करने के लिए समझदार होना जरुरी है, उसी तरह से अच्छा प्रदर्शन देने के लिए धैर्य रखना बहुत जरूरी है।
2970 वक्त बहुत कम है अगर हमे कुछ करना है तो अभी से शुरू कर देना चाहिए।
2971 वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।
2972 वर्ष भर नित्यप्रति मौन रह कर भोजन करने वाला करोडो चतुर्युगो तक (एक युग से चार युग –सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलयुग होते हैं और प्रत्येक की आयु क्र्मशा 12, 10, 8, और 6 वर्ष मानी गई हैं ) स्वर्ग में निवास करता हैं और देवो द्वारा पूजा जाता हैं।
2973 वसंत ऋतु में यदि करील के वृक्ष पर पत्ते नहीं आते तो इसमें वसंत का क्या दोष है ? सूर्य सबको प्रकाश देता है, पर यदि दिन में उल्लू को दिखाई नहीं देता तो इसमें सूर्य का क्या दोष है ? इसी प्रकार वर्ष का जल यदि चातक के मुंह में नहीं पड़ता तो इसमें मेघों का क्या दोष है ? इसका अर्थ यही है कि ब्रह्मा ने भाग्य में जो लिख दिया है, उसे कौन मिटा सकता है ?
2974 वह  व्यक्ति  या  वह  समाज  जिसके  पास  सीखने  को  कुछ  नहीं  है  वह  पहले  से  ही  मौत  के  जबड़े  में  है।
2975 वह इंद्र के राज्य में जाकर क्या सुख भोगेगा, जिसकी पत्नी प्रेमभाव रखने वाली और सदाचारी है। जिसके पास में संपत्ति है। जिसका पुत्र सदाचारी और अच्छे गुण वाला है जिसको अपने पुत्र द्वारा पौत्र हुए है।
2976 वह काम सबसे पहले करो, जिसे करने में आपको डर लगता है।
2977 वह चीज जो दूर दिखाई देती है, असंभव दिखाई देती है और हमारी पहुँच से बहार दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल कि जा सकती है यदि व्यक्ति तप करता है, क्यों की तप से ऊपर कुछ भी नहीं हैं।
2978 वह जो पचास लोगों से प्रेम करता है उसके पचास संकट हैं, वो  जो किसी से प्रेम नहीं करता उसके एक भी संकट नहीं है।
2979 वह जो भी मनुष्य का दिमाग बना सकता है, उसे उसका चरित्र नियंत्रित कर सकता है।
2980 वह मनुष्य व्यर्थ ही पैदा होता है, जो बहुत ही कठिनाईयों से प्राप्त होने वाले मनुष्य जन्म को यूँ ही गवां देता हैं और अपने पुरे जीवन में भगवान का अहसास करने की कोशिश ही नहीं करता है।
2981 वह लोग धन्य है, जिन्होंने संसार रूपी समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली। उनकी शरणागति ने नौका का काम किया। वे ऐसे मुसाफिरों की तरह नहीं है जो ऐसे सामान्य जहाज पर सवार है और जिसको डूबने का खतरा है।
2982 वह व्यक्ति जिसके हाथ स्वच्छ है वह कार्यालय में काम नहीं करना चाहता अर्थात् उसे किसी पद की चाहत नहीं हैं, जिस ने अपनी कामनाओ को खत्म कर दिया है वह शारीरिक श्रंगार नहीं करता, मुर्ख पुरुष प्रिय और मधुर वचन नहीं बोल पाता, स्पष्ट बोलने वाला कभी धोखेबाज, धूर्त और मक्कार नहीं होता।
2983 वह सब कुछ प्राप्त कर लेता हैं जो इन्तजार करने के बजाय विपरीत परिस्थियों में भी काम करता रहता हैं।
2984 वहां प्रेम नहीं है जहां इच्छा नहीं है .
2985 वही कार्य सबसे अच्छा है जिससे बहुसंख्यक लोगो को अधिक से अधिक आनंद मिल सके। 
2986 वही जाए जहाँ सिर्फ समझदारी की बातें होती है, इसलिए बेवकूफ लोगों से भरे जन्नत से बेहतर समझदार नर्क में जाना होगा।
2987 वही दो लोग, करीबी दोस्त बन सकते है जो किसी एक चीज से प्रेरित होते है।
2988 वही राज्य जल्दी आगे बढ़ता है जहां नियम कानून कम होते है, लेकिन जितने भी कानून होते है उनका पालन बहुत सख्ती से किया जाता है।
2989 वही लोग सफल होते हैं जो जानते हैं कि वे सफल ही होंगे।
2990 वही व्यक्ति खुश रहना जानता है जो चीज़ों और घटनाओं के होने का कारण जानता है।
2991 वही व्यक्ति बुद्धिमान हैं जो अवसर के अनुकूल बात करें, अपनी सामर्थ्य के अनुरूप साहस करें और अपनी शक्ति के अनुरूप क्रोध करें। इसके विपरीत अवसर को बिना पहचाने उल-जुलूल बातें करने वाला, अपनी शक्ति से बढ़कर दुस्साहस करने वाला निश्चित रूप से ही संकट में पड़ जाता हैं और दुखी होता हैं।
2992 वही साधुता है कि स्वयं समर्थ होने पर क्षमाभाव रखे। 
2993 वास्तविक सोन्दर्य ह्रदय की पवित्रता में है।
2994 वास्तविकता को जानने का मतलब है कि आप बदलाव के लिए ऐसी पद्धति विकसित करे जो वास्तविकता के हो।
2995 वाहनों पर यात्रा करने वाले पैदल चलने का कष्ट नहीं करते।
2996 विचार अथवा मंत्रणा को गुप्त न रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है।
2997 विचार न करके कार्ये करने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है।
2998 विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है।
2999 विचार, धन है, हिम्मत रास्ता है। कड़ी मेहनत समाधान है।
3000 विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है।

Sunday, July 3, 2016

#2801-2900


2801 यह नहीं कहा जा सकता हैं कि प्रत्येक पर्वत पर मणि-माणिक्य की प्राप्त होंगे, इसी प्रकार प्रत्येक हाथी के मस्तक से मुक्ता–मणि नहीं प्राप्त होती। संसार में मनुष्यों की कमी न होने पर भी अच्छे पुरुष सब जगह नहीं मिलते। इसी प्रकार चन्दन के कुछ वन तो हैं, परन्तु सभी वनों में चन्दन के वृक्ष उपलब्ध नहीं होते।
2802 यह निश्चय करना की आपको क्या नहीं करना है उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना की यह निश्चय करना की आप को क्या करना है।  
2803 यह निश्चय है कि बंधन अनेक है, परन्तु प्रेम का बंधन निराला है। देखो, लकड़ी को छेदने में समर्थ भौंरा कमल की पंखुड़ियों में उलझकर क्रियाहीन हो जाता है, अर्थात प्रेमरस से मस्त हुआ भौंरा कमल की पंखुड़ियों को नष्ट करने में समर्थ होते हुए भी उसमे छेद नहीं कर पाता।
2804 यह निश्चित है की शरीरधारी जीव के गर्भकाल में ही आयु, कर्म, धन, विध्या, मृत्यु इन पांचो की सृष्टि साथ-ही-साथ हो जाती है।
2805 यह बच्चों के साथ ही संभव है की आप तर्क, गणित  भौतिक ज्ञान के विकास की प्रक्रिया को समझ सकते है
2806 यह बात कई बार कही जा चुकी हैं कि बाहरी चीजों में खुशिया न तलाशें।  अगले साल में प्रवेश करने से पहले  इस बात को गाँठ बांध लीजिये।
2807 यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो, जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..
2808 यह मधु मक्खी जो कमल की नाजुक पंखडियो में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, वह अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना ताव मारती है।क्यों की वह ऐसे देश में आ गयी है जहा कमल है ही नहीं, उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते है।
2809 यह मन, यह विश्वास जिसमे हैं, वे ही कह सकते हैं कि दरिद्रता ही हमारी प्रतिज्ञा हैं
2810 यह महत्वपूर्ण नहीं है आपने कितना दिया, बल्कि यह है की देते समय आपने कितने प्रेम से दिया।
2811 यह महत्वपूर्ण नहीं है की आपके पास क्या नहीं है। आपके पास क्या है और आप उसका कैसे उपयोग करते हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। 
2812 यह महान आदमी की निशानी है कि वह तुच्छ चीजों को तुच्छ की तरह और महत्वपूर्ण बातों को महत्वपूर्ण की तरह महत्व देते है।
2813 यह मानव-जीवन सीमित हैं और कार्यो और ज्ञान की सीमा अनंत हैं इस स्थिति में मनुष्य को शास्त्रों का सार ही ग्रहण करना चाहिए।उसी प्रकार जैसे हंस पानी छोड़कर उसमे मिला हुआ दूध पी लेता है।
2814 यह विधि की विडम्बना हैं कि स्वर्ण में गन्ध, गन्ने में फल और चन्दन में फूल नहीं होते, इसी प्रकार विद्वान धनी नहीं होते और राजा दीर्घायु नहीं होते।
2815 यह संसार आशा के सहारे बंधा है।
2816 यह संसार की रीति हैं कि पंडितों से मुर्ख ईर्ष्या करते हैं, निर्धन बड़े बड़े धनिकों से अकारण द्वेष करते हैं वैश्याए तथा व्यभिचारिणी स्त्रिया पतिव्रताओ से तथा सौभाग्यवती स्त्रियों से विधवाएं द्वेष करती हैं।
2817 यह संसार नश्वर हैं, अनित्य हैं, नष्ट होने वाला हैं, तो भी लोभी मनुष्य अधर्माचरण में लिप्त रहता हैं चाणक्य ने कहा हैं की शरीर अनित्य हैं ऐसी स्थिति में मनुष्य को यथाशीघ्र धर्म-संग्रह में प्रवर्त हो जाना चाहिए जीवन के उपरान्त धर्म ही मनुष्य का सच्चा मित्र हैं।
2818 यह सच है कि उद्यमशीलता जोखिम लेने से ही आता है।
2819 यह सही हैं की सफलता का जश्न आप मनाये पर अपने पुराने बुरे समय को याद रखते हुए।
2820 यहाँ चाणक्य बन्धु-बान्धवों, मित्रो और परिजनों की पहचान बताते हुए कहते हैं की जब व्यक्ति को कोई असाध्य रोग घेर लेता हैं, जब वह किसी बुरी लत में पड़ जाता हैं अथवा उसे खाने-पीने की चीजो का आभाव हो जाता है, वह अकाल का ग्रास बन जाता है, उस पर किसी प्रकार का शत्रु आक्रमण करता हैं, राजा और सरकार की ओर से उस पर कोई case अथवा अभियोग लगाया जाता हैं और जब वह अपने किसी प्रियजन को उसकी मुर्त्यु पर श्मशान-भूमि ले जाता हैं, ऐसे समय में जो लोग उसका साथ देते हैं, वही वास्तव में उसके बन्धु-बान्धव होते हैं
2821 यही आप वह पाना चाहते हो जो लोगो के पास नहीं है तो आपको वह करना होगा जिसे लोग नहीं करना चाहते-
2822 यही दुनिया है! यदि तुम किसी का उपकार करो तो लोग उसे कोई महत्व नहीं देंगे, किन्तु ज्यो ही तुम उस कार्य को बंद कर दो, वे तुरंत तुम्हे बदमाश साबित करने में नहीं हिचकिचाएंगे।
2823 याचक कंजूस-से-कंजूस धनवान को भी नहीं छोड़ते।
2824 याचकों का अपमान अथवा उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
2825 यीशु ने कहा है की एक दूसरे से प्रेम करो। उन्होंने यह नहीं कहा की समस्त संसार से प्रेम करो।
2826 यीशु समझकर सबकी सेवा कर पाने पर ही विश्व में शान्ति के दवार खुलेंगे
2827 युग के अंत में सुमेरु पर्वत का चलायमान होना संभव हैं, कल्प के अन्त में सातों समुन्द्रो का अपनी मर्यादा का त्याग संभव हैं, परन्तु सज्जन महात्मा युग-युगान्तर में भी अपनी संकल्प एवम अपनी प्रतिज्ञा से कभी विचलित नहीं होते वे अपने निश्चय पर सैदव अडिग रहते हैं अत: उनका कथन सैदव विश्वसनीय होता हैं।
2828 युद्ध  मुख्या  रूप  से  भूलों  की  एक  सूची  है।
2829 युद्ध  में सत्य इतना कीमती होता है की उसे हमेशा झूठ के बॉडीगॉर्ड के साथ ही होना चाहिये।
2830 युद्ध असभ्यों का व्यापार है। 
2831 युद्ध किसी भी समस्या का स्थाई हल नहीं है। 
2832 युद्ध जितना पर्याप्त नहीं है, शांति कायम करना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। 
2833 युद्ध में आप एक  ही  बार  मारे  जा  सकते  हैं , लेकिन  राजनीति में  कई  बार।
2834 युद्ध ही शान्ति है। आज़ादी का मतलब दासता है। अज्ञानता ताकत है।
2835 युद्ध, किसी भी किसी समस्या का स्थाई हल नहीं होता।
2836 युवा आसानी से धोखा खाते है क्योंकि वो शीघ्रता से उम्मीद लगाते है।
2837 युवा उद्यमियों को मेरी सलाह है कि हार स्वीकार ना करें और चुनौतियों और नकारात्मक बलों का पूर्ण आशा और आत्मविश्वास के साथ सामना करें।
2838 युवाओं के लिए कलाम का विशेष संदेशः अलग ढंग से सोचने का साहस करो, आविष्कार का साहस करो, अज्ञात पथ पर चलने का साहस करो, असंभव को खोजने का साहस करो और समस्याओं को जीतो और सफल बनो। ये वो महान गुण हैं जिनकी दिशा में तुम अवश्य काम करो।
2839 युवाओं को एक अच्छा वातावरण दीजिये। उन्हें प्रेरित कीजिये।  उन्हें जो चाहिए वो सहयोग प्रदान कीजिये।  उसमे से हर एक आपार उर्जा का श्रोत है। वो कर दिखायेगा।
2840 यूं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे पता नही था की, 'कीमत चेहरों की होती है!!'
2841 यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है।     
2842 ये आठ गुण मनुष्य को यश देने वाले हैं –सद्विवेक, कुलीनता, निग्रह, सत्संग पराक्रम कम बोलना यथाशक्ति दान और कृतज्ञता।
2843 ये आठो कभी दुसरो का दुःख नहीं समझ सकते।
2844 ये एक आम कहावत है, और सभी कहते हैं, की ज़िन्दगी केवल कुछ समय के लिए पड़ाव है।
2845 ये कारण है, ना कि मौत, जो किसी को शहीद बनाता है। 
2846 ये जानने में की जीवन खुद से करने का प्रोजेक्ट है, आधी ज़िन्दगी चली जाती है।
2847 ये दुनिया बड़ी ही भयानक है, उन लोगो के कारण नहीं जो बुरा करते है बल्कि उन लोगो के कारण जो बुरा होते देखते है और बुरा होने देते है।
2848 ये बेरहम दुनिया है और इसका सामना करने के लिए तुम्हे भी बेरहम होना होगा।
2849 ये मत भूलो की धरती तुम्हारे पैरों को महसूस करके खुश होती है और हवा तुम्हारे बालों से खेलना चाहती है।
2850 ये मायने नहीं रखता की आप दुनिया में कैसे आये, ये मायने रखता है की आप यहाँ हैं.
2851 ये सचमुच सत्य है कि आप दूसरों को सफल होने में मदद करके सबसे तेजी और अच्छे से सफल हो सकते हैं.   
2852 ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।
2853 ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं. हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए.
2854 ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों.... यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
2855 योग्य सहायकों के बिना निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।
2856 योग्यता से बिताए हुए जीवन को,हमें वर्षों से नहीं बल्कि कर्मों के पैमाने से तौलना चाहिए। 
2857 यौवन, धन-संपत्ति, अधिकार और स्वामित्व और विवेकहीनता मानव को अनर्थ की ओर प्रेरित करते हैं। इन्हें पाकर मनुष्य को विन्रम और सावधान रहना चाहिए, यदि मनुष्य विवेक का पल्ला छोड़ देता हैं तो उसका विनाश होने में एक पल भी नहीं लगता।
2858 रचनात्मक (creativity) पर ध्यान दें। जब आप अपने मस्तिष्क का सही उपयोग करते हैं तब आप हकीकत में रचनात्मक बन जाते हैं क्यों कि एकाग्रता से ही रचनात्मक बना जा सकता हैं और ये ही क्वालिटी से आपके दिमाग के सारे बंद दरवाजे खोल देती हैं।
2859 रत्न कभी खंडित नहीं होता। अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।
2860 रत्नों की प्राप्ति बहुत कठिन है। अर्थात श्रेष्ठ नर और नारियों की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है।
2861 राज अग्नि दूर तक जला देती है।
2862 राजकुल में सदैव आते-जाते रहना चाहिए।
2863 राजधन की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखना चाहिए।
2864 राजनीति करना किसी खूबसूरत कला की तरह है।
2865 राजनीति को विज्ञान कहना बिलकुल सही है।
2866 राजनीति में कभी पीछे ना हटें, कभी अपने शब्द वापस ना लें…और कभी अपनी गलती ना मानें।
2867 राजनीति में तब तक किसी बात पर विश्वास मत करिये जब तक उस बात की घोषणा नहीं हो जाती है।
2868 राजनीति में भाग ना लेने का दंड यह है की आपको अपने से निम्न लोगों द्वारा शासित होना पड़ता है।
2869 राजनीति में मूर्खता एक बाधा नहीं है। 
2870 राजनीति, आपके चरित्र को तबाह कर सकती है।
2871 राजपरिवार से द्वेष अथवा भेदभाव नहीं रखना चाहिए।
2872 राजपुत्रों से नम्रता, पंडितों से मधुर वचन, जुआरियों से असत्य बोलना और स्त्रियों से धूर्तता सीखनी चाहिए।
2873 राजपुरुषों से संबंध बनाए रखें।
2874 राजसेवा में डरपोक और निकम्मे लोगों का कोई उपयोग नहीं होता।
2875 राजहंस दूध पी लेता है और पानी छोड़ देता है दूसरे पक्षी ऐसा नहीं कर सकते। इसी प्रकार साधारण पुरुष मोह-माया के जाल में फंसकर परमात्मा को नहीं देख सकता। केवल परमहंस जैसा मनुष्य ही माया को छोड़कर परमात्मा के दर्शन पाकर देवी सुख का अनुभव करते हैं।
2876 राजा अपनी आज्ञा बार-बार नहीं दोहराता वह एक ही बार आज्ञा देता हैं, जो उसके मुख से निकलता हैं वह आदेश होता हैं और उस पर वह स्थिर रहता हैं। पंडित लोग एक बार ही किसी कार्य की पूर्ति के लिए कहते हैं इसी प्रकार माता-पिता अपनी कन्या का विवाह –सम्बन्ध भी एक बार ही स्थिर करते हैं, इस सम्बन्ध में जो बात एक बार निश्चित हो जाती हैं, कन्या उसी की हो जाती हैं इस प्रकार राजा, विद्वान तथा कन्याओ के विवाह–सम्बन्ध आदि के लिए माता-पिता का वचन अटल होता हैं तीनो –राजा, पण्डित तथा माता-पिता द्वारा बोले वचन लौटाए नहीं जाते, अपितु निभाए जाते हैं।
2877 राजा अपनी प्रजा के द्वारा किए गए पाप को, पुरोहित राजा के पाप को, पति अपनी पत्नी के द्वारा किए गए पाप को और गुरु अपने शिष्य के पाप को भोगता है।
2878 राजा अपने गुप्तचरों द्वारा अपने राज्य में होने वाली दूर की घटनाओ को भी जान लेता है।
2879 राजा अपने बल-विक्रम से धनी होता है। 
2880 राजा का कर्तव्य है कि वह अपने राज्य के विभिन्न प्रदेशों में घूम-घूम कर अपनी प्रजा के सम्बन्ध में सब तरह की जानकारी प्राप्त करे, इसी प्रकार जो साधु अथवा योगी पुरुष विभिन्न स्थानों पर घूमते हैं तो लोग उनकी पूजा करते हैं किन्तु बिना कारण इधर-उधर घुमने वाली स्त्री पतन का ही शिकार हो जाती हैं।
2881 राजा का यह कर्तव्य है की वह अपने राज्य में पाप-कर्म न होने दे उसका यह भी कर्तव्य है की वह अपराधियों और दुष्टो को दंड दे तथा प्रजा को पापकर्म से अलग रखे यदि वह ऐसा नहीं कर पाता तो प्रजा द्वारा किये गए पापकर्मो के लिए उसे ही दोषी ठहराया जायेगा और उसे उन पापो का फल भुगतना होगा।
2882 राजा की आज्ञा का कभी उल्लंघन न करे।
2883 राजा की पत्नी, गुरु की स्त्री, मित्र की पत्नी, पत्नी की माता (सास) और अपनी जननी ----ये पांच माताएं मानी गई है। इनके साथ मातृवत् व्यवहार ही करना चाहिए।
2884 राजा की भलाई के लिए ही नीच का साथ करना चाहिए।
2885 राजा की शक्ति उसके बाहुबल में, ब्राह्मण की शक्ति उसके तत्व ज्ञान में और स्त्रियों की शक्ति उनके सौंदर्य तथा माधुर्य में होती है।
2886 राजा के दर्शन देने से प्रजा सुखी होती है।
2887 राजा के दर्शन न देने से प्रजा नष्ट हो जाती है।
2888 राजा के पास खाली हाथ कभी नहीं जाना चाहिए।
2889 राजा के प्रतिकूल आचरण नहीं करना चाहिए।
2890 राजा धर्मात्मा होता हैं तो प्रजा भी धार्मिक होती हैं। राजा के पापी होने पर प्रजा में पापाचार फ़ैल जाता हैं और राजा के धर्म-अधर्म, पुण्य-पाप से उदासीन अथार्त धर्मविमुख हो जाती हैं, यह नियम घर में भी लागु होता हैं घर में भी माँ-बाप जैसे काम करेंगे संतान भी वही करेगी।
2891 राजा योग्य अर्थात उचित दंड देने वाला हो।
2892 राजा लोग एक ही बार बोलते है (आज्ञा देते है), पंडित लोग किसी कर्म के लिए एक ही बार बोलते है (बार-बार श्लोक नहीं पढ़ते), कन्याएं भी एक ही बार दी जाती है। ये तीन एक ही बार होने से विशेष महत्व रखते है।
2893 राजा लोग और राजपुरुष महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट राजकीय सेवाओं में कुलीन पुरुषो की नियुक्ति को इसलिए प्राथमिकता देते हैं, क्योकि वे अपने उच्च संस्कारो तथा परंपरागत शिक्षा–दीक्षा के कारण राजा का संग कभी नहीं छोड़ते वे उसकी उन्नति, सामन्य अवस्था और कठिनाई के समय में भी उसका साथ देते है वे हर अवस्था में समान भाव के साथ निभाते हैं वे न कभी अपने स्वामियों को छोड़ते हैं और न ही उन्हें धोखा देते हैं ।
2894 राजा शासन तो करता है, लेकिन हुकूमत नहीं करता है।
2895 राजा से बड़ा कोई देवता नहीं।
2896 राजा, अग्नि, गुरु और स्त्री, इनसे सामान्य व्यवहार करना चाहिए क्योंकि अत्यंत समीप होने पर यह नाश के कारण होते है और दूर रहने पर इनसे कोई फल प्राप्त नहीं होता। 
2897 राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनो का एक मत होना किसी भी मंत्रणा की सफलता है।
2898 राजा, वेश्या, यमराज, अग्नि, चोर, बालक, भिक्षु और आठों गांव का कांटा, ये दूसरे के दुःख को नहीं जानते।
2899 राजाज्ञा से सदैव डरते रहे।
2900 राज्य के गठन का हमारा ध्येय सभी का परम आनंद है,किसी श्रेणी विशेष का नहीं।

Friday, May 13, 2016

#2701-2800



2701 मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गयी है।
2702 मौत से डरो मत, यह आधे-अधूरे जीवन की तुलना में कम भयावह होती है।
2703 मौत हमारे लिए चिंता का विषय नहीं है क्योकि जब तक हम जीवित है उसका कोई अस्तित्व नहीं है और जब वो आएगी तब हम नहीं रहेंगे। 
2704 मौन सबसे सशक्त भाषण है, धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी।
2705 मौसम में बदलाव आने के साथ खुद को बदलना सीखे और नई दुनिया बनाएं। 
2706 यज्ञ न करने वाले का वेद पढ़ना व्यर्थ है। बिना दान के यज्ञ करना व्यर्थ है। बिना भाव के सिद्धि नहीं होती इसलिए भाव अर्थात प्रेम ही सब में प्रधान है।
2707 यथार्थ महापुरुष वह आदमी है जो न दूसरे को अपने अधीन रखता है और न स्वयं दूसरों के अधीन होता है।
2708 यथार्थ में अच्छा वही है जो उन सब लोगों से मिलकर रहता है जो बुरे समझे जाते हैं।
2709 यदि  आप  दृढ  संकल्प  और  पूर्णता  के  साथ  काम  करेंगे  तो  सफलता  ज़रूर  मिलेगी.
2710 यदि  आप  नरक  से  गुज़र रहे  हों  तो  चलते  जाइये।
2711 यदि  आप  सचमुच  विश्व – स्तरीय  होना  चाहते  हैं – जितने   अच्छे  हो  सकते  हैं   होना  चाहते  हैं  तो अंतत:   ये  आपकी  तैयारी  और  अभ्यास  पर  निर्भर  करेगा.
2712 यदि  आपकी  कोई विशेष निष्ठा या धर्म है, तो अच्छा है। लेकिन आप उसके बिना भी जी सकते हैं।
2713 यदि  स्वयं  में  विश्वास  करना  और  अधिक  विस्तार  से  पढाया  और  अभ्यास  कराया   गया  होता  , तो  मुझे  यकीन  है  कि  बुराइयों  और  दुःख  का  एक  बहुत  बड़ा  हिस्सा  गायब  हो  गया होता।
2714 यदि  हम  भूत  और  भविष्य  के  विवाद  में  फंसते  हैं  तो  हम  पायेंगे  कि  हमने  भविष्य  खो  दिया  है।
2715 यदि अतिथि नहीं होते तो सब घर कब्र बन जाते।
2716 यदि आप  100 शेरो की एक सेना बनाते है जिसका सेनापति एक कुत्ता है तो युद्ध में सारे शेर कुत्तों की मौत मारे जाएंगे। लेकिन यदि आप  100 कुत्तों की एक सेना बनाते है जिसका सेनापति एक शेर है तो सारे कुत्ते युद्ध में शेर की तरह लड़ेंगे। 
2717 यदि आप अपनी ड्यूटी को सैल्यूट करोगे तो आपको किसी भी व्यक्ति को सैल्यूट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी लेकिन यदि आप  अपनी ड्यूटी को पोल्यूट करेंगे तो आपको हर किसी को सैल्यूट करना पडेगा।
2718 यदि आप अपने सपने पुरे नहीं करोंगे तो कोई और आपको अपने सपने पुरे करने के काम में लगाएगा।
2719 यदि आप एक अच्छे काठ साज़ बनना चाहते है तो सबसे खराब घोड़े की काठ बनाए ; यदि आप ने उस एक को वश में कर लिया तो आप सब को वश में कर सकते है।
2720 यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा। 
2721 यदि आप एक बार अपने साथी का भरोसा तोड़ दें तो फिर कभी उनका सत्कार और सम्मान नहीं पा सकेंगे।
2722 यदि आप किसी चीज़ को साधारण तरीके से नहीं समझा सकते है तो इसका मतलब है की आप उसको सही ढंग से नहीं समझ पाए हैं।
2723 यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करें जो वो समझता है , तो बात उसके सर में जाती है , यदि आप उससे उसकी भाषा में बात करते हैं, तो बात उसके दिल तक जाती है।
2724 यदि आप केवल मुस्कुराएंगे तो आप पाएंगे की ज़िन्दगी अभी भी मूल्यवान है ।
2725 यदि आप गरीब जन्मे है तो यह आपकी गलती नहीं है लेकिन यदि आप गरीब मरते है तो यह आपकी गलती है।
2726 यदि आप जीतते है तो आप को कुछ भी एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यदि आप हार जाते है तो आपको वहां एक्सप्लेन करने के लिए नहीं होना चाहिए।
2727 यदि आप दुसरो को खुश देखना चाहते है तो सहानुभूति को अपनाइये। यदि आप खुश होना चाहते है तो सहानुभूति अपनाइये।
2728 यदि आप दूसरों की मदद कर सकते हैं, तो अवश्य करें; यदि नहीं कर सकते हैं तो कम से कम उन्हें नुकसान नही पहुचाइए।
2729 यदि आप दूसरों को प्रसन्न देखना चाहते हैं तो करुणा का भाव रखें।  यदि आप स्वयं प्रसन्न रहना चाहते हैं तो भी करुणा का भाव रखें।
2730 यदि आप दृढ संकल्प और पूर्णता के साथ काम करेंगे तो सफलता ज़रूर मिलेगी.
2731 यदि आप दृढ़ संकल्प के साथ और पूर्णता के साथ काम करते हैं, तो सफलता आपका पीछा करेगी।
2732 यदि आप पागल ही बनना चाहते हैं तो सांसारिक वस्तुओं के लिए मत बनो, बल्कि भगवान के प्यार में पागल बनों।
2733 यदि आप प्रसन्नतापूर्वक जीना चाहते हो तो इसे एक व्यक्ति या वस्तु के बजाय एक लक्ष्य से बांधो।
2734 यदि आप रोते हो क्योंकि सूरज आपके जीवन से  बाहर चला गया है और आपके आँसू  आपको सितारों को  देखने के लिए रोकेंगे।
2735 यदि आप वास्तव में बहुत बारीकी से देखोगे तो आप पाओगे की रातो रात मिलने वाली अधिकतर सफलताओ में बहुत लम्बा वक़्त लगा है।
2736 यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा।
2737 यदि आप सौ लोगो को नहीं खिला सकते तो एक को ही खिलाइए।
2738 यदि आपकी नज़र लाभ पर रहेगी तो आपका ध्यान उत्पाद की गुणवत्ता से हट जायेगा। लेकिन यदि आप एक अच्छा उत्पाद बनाने पर ध्यान लगाओगे तो लाभ अपने आप आपका अनुसरण करेंगा।
2739 यदि आपको अपने चुने हुए मार्ग पर विश्वास है, इस पर चलने का साहस है और मार्ग की हर कठिनाई को जीतने की शक्ति है; तो आपका सफल होना निश्चित है।
2740 यदि आपको लगता है कि आप कर सकते हैं - तो आप कर सकते हैं! अगर आपको लगता है कि आप नहीं कर सकते - तो आप नहीं कर सकते दोनों ही सूरतों में आप सही हैं 
2741 यदि आपने अपनी मनोवृतियों पर विजय प्राप्त नहीं की, तो मनोवृत्तियां आप पर विजय प्राप्त कर लेंगी।
2742 यदि उद्देश्य नेक ना हो तो ज्ञान बुराई बन जाता है।
2743 यदि एक ही कर्म से समस्त संसार को वश में करना चाहते हो तो पंद्रह मुखों से विचरण करने वाले मन को रोको, अर्थात उसे वश में करो। पंद्रह मुख है ------मुंह, आँख, नाक, कान, जीभ, त्वक, हाथ, पैर, लिंग, गुदा, रस, गंध, स्पर्श और शब्द।
2744 यदि काम किसी काम के लिए माकूल अवसर, आईडिया या परिस्थियों की प्रतीक्षा कर रहे है तो आप कुछ भी हासिल नहीं कर पायेंगे।
2745 यदि किसी कार्य के सम्बन्ध में कोई योजना बनाई हो तो उसे वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए अथार्त उसे कार्यरूप में परिणत करने तक गुप्त मात्र के समान सुरक्षित रखना चाहिए।
2746 यदि किसी को अपने मित्र के रहस्य यानि गुप्तकार्य मालूम हैं तो उन्हें प्रकट नहीं करना चाहिए, इससे कोई लाभ नहीं केवल शत्रुता पैदा होती हैं, जिससे दोनों को हानि होती हैं।
2747 यदि किसी रहस्य को बनाए रखना चाहते है, तो इसे खुद से भी छुपा कर रखिए।
2748 यदि कोई अपना पूरा समय मुझमें लगाता है और मेरी शरण में आता है तो उसे अपने शरीर या आत्मा के लिए कोई भय नहीं होना चाहिए.
2749 यदि कोई दुर्बल मनुष्य अपमान करे तो उसे क्षमा कर दो, क्योंकि क्षमा करना ही वीरो का काम है, परन्तु यदि अपमान करने वाला बलवान हो तो उसको अवश्य दंड दो। 
2750 यदि जनरल मोटर्स कम्प्यूटर इंडस्ट्री के हिसाब से अपनी टेक्नोलॉजी का विकास करता तो आज हम $25 की कार चला रहे होते जो 1000 माईल्स पर गैलन के हिसाब से चलती।
2751 यदि जन्म-जन्मांतर से प्राणी ने दान देने तथा शास्त्रों के अध्ययन और तप करने का जो अभ्यास किया होता हैं तो नया शरीर मिलने पर उसी अभ्यास के कारण ही वह सत्कर्मो की ओर परवर्त होता हैं।
2752 यदि तुम अपने अंदर कुछ लिखने की प्रेरणा का अनुभव करो तो तुम्हारे भीतर ये बातें होनी चाहिए- 1. ज्ञान कला का जादू, 2. शब्दों के संगीत का ज्ञान और 3. श्रोताओं को मोह लेने का जादू।
2753 यदि तुम ईश्वर की दी हुई शक्तियो का सदुपयोग नहीं करोगे तो वह अधिक नहीं देगा। इसलिए प्रयत्न आवश्यक है ईश-कृपा के योग्य बनने के लिए भी पुरुषार्थ चाहिए।
2754 यदि तुम उड़ नहीं सकते हो तो दौड़ो, यदि तुम दौड़ नहीं सकते हो तो चलो, यदि तुम चल नहीं सकते हो तो रेंगो।  लेकिन, तुम जैसे भी करो, तुम्हे आगे बढ़ना ही होगा।
2755 यदि तुम जाति, देश और व्यक्तिगत पक्षपातों से जरा ऊँचे उठ जाओ तो निःसंदेह तुम देवता के समान बन जाओगे।
2756 यदि तुम्हारे हाथ रुपए से भरे हुए हैं तो फिर वे परमात्मा की वंदना के लिए कैसे उठ सकते हैं।
2757 यदि तुम्हारे हृदय में ईर्ष्या, घृणा का ज्वालामुखी धधक रहा है, तो तुम अपने हाथों में फूलों के खिलने की आशा कैसे कर सकते हो?
2758 यदि परिवार के एक व्यक्ति के बलिदान अथवा परित्याग से कुल की रक्षा होती हैं तो उसके परित्याग में संकोच नहीं करना चाहिए, क्योकि एक से अनेक का महत्व अधिक हैं। यदि पूरे परिवार के त्याग-बलिदान से गाँव की रक्षा होती हैं को कुल के बलिदान में सोच-विचार नहीं करना चाहिए इसी प्रकार यदि अपने बचाव के लिए परिवार के एक व्यक्ति की नहीं, पुरे परिवार की नहीं, गाँव की नहीं अपुतु यदि पुरे संसार की भी बलि देनी पड़े तो निसंकोच दे देनी चाहिए क्योकि अपने के बढ़कर कुछ नहीं।
2759 यदि पुत्र हो तो पिता का भक्त हो अथार्त माता-पिता के दुखों को दूर करने में जो सहायक होता है, वही पुत्र कहलाने का अधिकारी होता हैं इसी प्रकार संतान का भरण-पोषण करने वाला, उनके सुख-दुःख का ध्यान रखने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थो में पिता कहला सकता हैं। विश्वास करने योग्य व्यक्ति को ही अच्छा मित्र कहा गया है और अपने पति को सुख देने वाली स्त्री को ही सच्चे अर्थो में पत्नी माना गया हैं।
2760 यदि पुराने आइडिया को भी नए तरीके से पेश कर सके तो इसका मतलब है कि हमारा दिमाग सक्रिय है।
2761 यदि भगवान जगत के पालनकर्ता है तो हमें जीने की क्या चिंता है? यदि वे रक्षक न होते तो माता के स्तनों से दूध क्यों निकलता? यही बार-बार सोचकर हे लक्ष्मीपति ! अर्थात विष्णु ! मै आपके चरण-कमल में सेवा हेतु समय व्यतीत करना चाहता हूं।
2762 यदि भारत को एक महान राष्ट्र बनना चाहता है, तो हमें भरोसा करने का साहस होना चाहिए. यह मेरा विश्वास है।
2763 यदि मद मस्त हाथी अपने माथे से टपकने वाले रस को पीने वाले भौरों को कान हिलाकर उड़ा देता है, तो भौरों का कुछ नहीं जाता, वे कमल से भरे हुए तालाब की ओर ख़ुशी से चले जाते है। हाथी के माथे का श्रृंगार कम हो जाता है उसी प्रकार धनी लोगो को चाहिए कि याचको को निराश न लौटाएं।
2764 यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।
2765 यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए।
2766 यदि मानव जीवन को जीवित रखना है तो हमें बिलकुल नयी सोच की आवश्यकता होगी।
2767 यदि मानवो में पृथ्वी के समान क्षमाशील पुरुष न हो तो मानवों में कभी संधि हो ही नही सकती, क्योंकि झगडे की जड़ तो क्रोध ही है। 
2768 यदि मुक्ति चाहते हो तो समस्त विषय-वासनाओं को विष के समान छोड़ दो और क्षमाशीलता, नम्रता, दया, पवित्रता और सत्यता को अमृत की भांति पियो अर्थात अपनाओ।
2769 यदि मेहनत करने के बाद भी सपने पुरे न हो तो रास्ता बदलो सिद्धान्त नहीं, क्योंकि वृक्ष भी हमेशा पते बदलते है अपना मूल नही |
2770 यदि ये सात व्यक्ति – विधार्थी, नौकर, राह चलने वाले मुसाफिर, भूखा, भय से घबराया हुआ, भण्डारी अथार्त भोजन-सामाग्री के संग्रालय का अधिकारी तथा द्वारपाल – सो रहे हो, तो इन्हें निसंकोच भाव से जगा देना चाहिए, क्योकि इनके कर्तव्य-कर्म का निर्वाह इनके जागते रहने में ही है, सोने में नहीं। इनका सोना इनके प्रमाद का सूचक और हानिकारक है। यही कारण है कि इन सोये हुओ को जगाने पर कृतज्ञता मिलती है जगाने वाले को अच्छा ही कहा जायेगा।
2771 यदि लोगों को पता लग जाए की अपनी कला  महारत हासिल करने के लिए मुझे कितनी मेहनत करनी पड़ी है तो उन्हें यह इतनी खूबसूरत नहीं लगेगी। 
2772 यदि विष में भी अमृत की प्राप्ति होती हैं तो उसको ग्रहण कर लेना चाहिए,उसका परित्याग नहीं करना चाहिए इसी प्रकार यही किसी गन्दी जगह सोना आदि मूल्यवान वस्तु पड़ी हो तो उसको उठा लेना चाहिए, अथार्थ यदि किसी नीच व्यक्ति के पास अच्छी विधा हैं अच्छा गुण हैं तो उसको ग्रहण करने में संकोच नहीं करना चाहिए और कोई नीच कुल की शालीन स्त्री अच्छे गुण से युक्त हैं तो उसको ग्रहण करने में कोई हानि नहीं हैं
2773 यदि व्यक्ति ज्ञान के अनुरूप आचरण नहीं करता तो वह ज्ञान व्यर्थ हैं, अज्ञानी मनुष्य का जीवन व्यर्थ हैं सेनापति के बिना सेना व्यर्थ हैं और पुरुष अथार्थ पति के बिना स्त्री का जीवन व्यर्थ हैं।
2774 यदि व्यक्ति संसार के सभी प्राणियों के वशीकरण का मंत्र सचमुच में ही जानना चाहता हैं तो एक बड़ा ही सरल और सर्वथा अव्यर्थ जाने वाला उपाय यह हैं कि व्यक्ति को अपनी वाणी को परनिंदा से बचाना चाहिए। दूसरों को अपने वश में करने के इच्छुक व्यक्ति को कभी किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए।
2775 यदि शत्रु अपने से अधिक बलवान हो तो उसके साथ विनय और दुष्ट शत्रु को बल–प्रयोग द्वारा वश में किया जाए इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को समय के अनुरूप बल अथवा विनय का प्रयोग करना चाहिए।
2776 यदि स्त्री सुन्दर हो और घर में लक्ष्मी हो, पुत्र विनम्रता आदि गुणों से युक्त हो और पुत्र का पुत्र घर में हो तो इससे बढ़कर सुख तो इन्द्रलोक में भी नहीं। ऐसी स्थिति में स्वर्ग घर में ही है।
2777 यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।
2778 यदि हम अपने काम में लगे रहे तो हम जो चाहें वो कर सकते हैं.
2779 यदि हम भूत और भविष्य के विवाद में फंसते है तो हम पाएंगे की हमने भविष्य खो दिया है।
2780 यदि हम युद्ध को खत्म नहीं करेंगे तो वह हमें खत्म कर देगा।
2781 यदि हम विश्वास के साथ लड़ते हैं तो हमारी शक्ति दुगनी हो जाती है।
2782 यदि हम सवतंत्र नहीं है तो कोई भी हमारा आदर नहीं करेगा।
2783 यदि हम हर वो चीज कर दें जिसके हम सक्षम हैं, तो सचमुच हम खुद को ही चकित कर देंगे।
2784 यदि हम ज़िन्दगी मिलने से खुश हैं तो मृत्यु के लिए भी शिकायत नहीं करनी चाहिए क्योंकि दोनों देनेवाला तो एक ही है।
2785 यदि हमारे मन में शांति नहीं है तो इसकी वजह है कि हम यह भूल चुके हैं कि हम एक दुसरे के हैं।
2786 यद्पि मेरी बुद्धि देववाणी (संस्कृत) में श्रेष्ठ है, तब भी मै दूसरी भाषा का लालची हूं। जैसे अमृत पीने पर भी देवताओं की इच्छा स्वर्ग की अप्सराओं के ओष्ट रूपी मद्ध  को पीने की बनी रहती है।
2787 यद्यपि आप अल्पमत में हों, पर सच तो सच है।
2788 यवन से बढ़कर अथार्थ धर्मविरोधी व्यक्ति से बढ़कर संसार में कोई और बड़ा नीच नहीं हैं इसलिए उससे तो सवर्था दूर ही रहना चाहिए।
2789 यश शरीर को नष्ट नहीं करता।
2790 यह  भगवान  से  प्रेम  का  बंधन  वास्तव  में ऐसा है  जो  आत्मा  को  बांधता  नहीं  है  बल्कि  प्रभावी  ढंग  से  उसके  सारे  बंधन  तोड़  देता  है।
2791 यह आश्चर्यजनक बात है बहुत से लोगों ने अपने दिमाग से सुव्यस्थित निश्चित रूप से कार्य करने के लिए प्रयास किया हैं।
2792 यह उचित है की हर व्यक्ति को वह दिया जाये जिसके वो योग्य है।
2793 यह एक निश्चित तथ्य है कि बहुत से लोगो का समूह ही शत्रु पर विजय प्राप्त करता है, जैसे वर्षा की धार को धारण करने वाले मेघों के जल को तिनको के द्वारा (तिनके का बना छप्पर) ही रोका जा सकता है।
2794 यह एक रणक्षेत्र है, मेरा शरीर, जिसने बहुत कुछ सहा है.
2795 यह काम वैसे तो आसन नहीं हैं लेकिन ये है बहुत ही जरुरी, अगर आप बात बात अपना आपा खो देंगे तो लोक-वयवहार में कमी आएगी और आपको अपने लक्ष्य प्राप्त करने में ज्यादा समय लगेगा।
2796 यह ज़रूरी है कि हम अपना दृष्टिकोण  और ह्रदय जितना सभव  हो अच्छा करें।  इसी से हमारे और अन्य लोगों के जीवन में, अल्पकाल और  दीर्घकाल दोनों में ही खुशियाँ आयंगी।
2797 यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दुसरो के लिए जीते है, वे वास्तव में जीते है।
2798 यह दुनिया एक किताब की तरह है, जो लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते नहीं है, वह इस किताब का सिर्फ एक ही पन्ना पढ़ते है।
2799 यह दुनिया खुशियों से भर जाएगी अगर मनुष्य के पास चुप रहने की उतनी ही ताकत हो, जितनी बोलने की है।
2800 यह नश्वर शरीर जब तक निरोग व स्वस्थ है या जब तक मृत्यु नहीं आती, तब तक मनुष्य को अपने सभी पुण्य-कर्म कर लेने चाहिए क्योँकि अंत समय आने पर वह क्या कर पाएगा।